meri chahat
आज गाँधी चाहिए ,सुभाष चाहिए,
मेरे देश को भगत सिंघ आज़ाद चाहिए.
जिस ताज के बनाने से कटते हॉ सेकाडो कारीगरो के हाथ,
ऐसा ताज ना मुमताज़ चाहिए
जान बूझकर पतिवर्तै को ठुकराते हो जहाँ राम,
मेरे देश को ना ऐसा राम राज चाहिए
खुद को हार कर लगाते हों द्रौपदी को दांव पर ,
हमें ना वो युधीसटिर महाराज चाहिए
शिष्या का छीन लेते हैं जहाँ अंगूठा गुरु ,
हमे ना ऐसा उस्ताद चाहिए
कांटा तुम्हे लगे और दर्द हो उसको,
हमे तो हर सक्श का ऐसा ज़ज़्बात चाहिए,
--महाबीर सिंग खर्ब